Nov 11, 2016







सामूहिक, एकल, साइलेंट, म्यूज़िकल,प्रयोगात्मक इस तरह के विभिन्न नाटकों का आनंद मिलता है इस संगम में…इसी क्रम में जयरंगम नुक्कड़ नाटकों की प्रतियोगिता भी आयोजित करवाता है….यह प्रतियोगिता खासकर स्कूली बच्चों के लिए आयोजित होती है लेकिन कई बड़े थियेटर ग्रुप भी अपने नुक्कड़ नाटक पेश करते हैं इसमें…


नुक्कड़ नाटक- ऐसे नाटक जिन्हें मंचन के लिए किसी बड़े सुसज्जित मंच की या किसी तरह की खास ऑडियन्स की ज़रूरत नहीं होती ….लेकिन फिर भी आम दर्शक के जेहन में गहन चोट के साथ किसी सकारात्मक संदेश को उतारता हुआ नाटक …


जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर होता है, नुक्कड़ नाटक कहीं भी किसी गली के मुहाने किसी सड़क के किनारे मंचित होते हैं ताकि एक आम राहगुज़र भी कुछ पल ठहर कर समाज के बारे में सोच सके….


लगभग चार साल पहले जयरंगम में ही श्री अरविंद गौड़ के ग्रुप अस्मिता थियेटर के नुक्कड़ नाटक और जयपुर के एक विशेष योग्यता वाले बच्चों के नुक्कड़ नाटक देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था मुझे….पहले वाले ने सामाजिक मुद्दे उठाते हुए आक्रोश से जोश भर दिया था हम दर्शकों में वहीं दूसरे ग्रुप ने अपने सशक्त अभिनय से सड़क पर खड़े होते हुए भी दर्शकों की आँखों को गंगा जमना बहाने पर मजबूर कर दिया था…मानसिक रूप से कमजोर कहे जाने वाले उन बच्चों के अभिनय को देख कर यह कहीं से भी महसूस नहीं हुआ कि ये बच्चे कहीं भी किसी सामान्य कहे जाने वाले बच्चों से उन्नीस रहे हों…





अद्भुत है यह नुक्कड़ नाटकों का संसार….


तभी से हर साल अब इंतज़ार रहता है जयरंगम का कि यदि समय की कमी भी है तो भी हरेक जन कम से कम नुक्कड़ नाटकों का आनंद उठा कर भी अपने आप को समाज से जुड़ा तो पाये …इस तरह जयरंगम विभिन्न कलाकारों को अपनी कला दुनिया के सामने लाने के लिए एक बहुत ही बड़ा प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध करवा रहा है….


तो आइये आप सब भी इस साल 21 नवंबर से शुरू होने वाले इस महासंगम में डुबकी लगाइए और मेरे इस आनंद के सहभागी बनिए….:)